*नेपाल बाढ़ त्रासदी: खुशियों के बीच का यह दर्दनाक जलप्रलय*
एक ओर जहाँ पूरा देश भाई-बहन के पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन की मिठास और राखियों की डोर में बँधी स्नेह की खुशियों में डूबा हुआ है, वहीं भारत से सटे नेपाल के हिमालयी घाटियों में प्रकृति ने एक भयंकर जलजला और जलप्रलय रच दिया है। ग्लेशियर के अचानक टूटने से आई इस विनाशकारी बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों को उजाड़ दिया है। हजारों परिवार आज अपनों की तलाश में आँखें बिछाए इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों के परिवार ही जलसमाधि हो गए। सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं और उनके परिजन रात-दिन प्रार्थना कर रहे हैं कि वे सकुशल लौट आएँ।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई इस अचानक बाढ़ ने गाँव, पुल, सड़कें और घरों को बहा दिया। मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और लापता लोगों में नेपाली नागरिकों के साथ सैकड़ों विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं—खासकर भारतीय तीर्थयात्री जो कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर निकले थे। शव नदी के मैदानी इलाकों तक बहकर पहुँचे हैं। बचाव दल हेलीकॉप्टरों और जमीनी टीमों के साथ दिन-रात खोज कर रहे हैं, लेकिन मलबे और कीचड़ के ढेर के नीचे दबे कई जीवन अभी भी इंतजार कर रहे हैं।
इस त्रासदी में सबसे ज्यादा दर्द उन परिवारों का है जिनके पूरे परिवार ही गायब हो गए। माँ-बाप बच्चों की प्रतीक्षा में बैठे हैं, बहनें भाइयों की राह देख रही हैं, और पत्नियाँ पतियों की वापसी की कामना कर रही हैं। कुछ लोग तो इतने टूट चुके हैं कि वे बस इतना ही कह पाते हैं—“मेरी पत्नी अब भी कीचड़ के नीचे कहीं है… वह चली गई।” ऐसे दृश्य देखकर दिल सिहर उठता है। त्यौहार की मिठास और राखी की डोर के बीच यह दर्द कितना गहरा है, इसे शब्दों में बाँधना मुश्किल है।
ऐसे परिवारों के दुख की घड़ी में हम सबको एकजुट होकर प्रार्थना करनी चाहिए। जो जीवित हैं, वे सकुशल अपने परिजनों से मिलें। जिनके पार्थिव शरीर अभी नदी या मलबे में दबे हैं, वे जल्द परिजनों को मिलें ताकि अंतिम संस्कार हो सके। और जिनका पूरा परिवार ही इस आपदा में गुम हो गया, उनकी आत्माओं को शांति मिले। भगवान से यही कामना करें कि यह पीड़ा जल्द समाप्त हो और बचाव कार्य सफल हों।
भारत और नेपाल की भाईचारा वाली संस्कृति में ऐसे संकट में हम सब एक हैं। राहत सामग्री भेजी जा रही है, मदद के हाथ बढ़ रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी जरूरत है सामूहिक प्रार्थना और संवेदना की। इस दर्द को अपने दिल में जगह देकर हम उन परिवारों के साथ खड़े हो सकते हैं।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम
कल 28 अगस्त शाम 7 बजे बस स्टैंड शाहिद चौक में मृत आत्माओं के लिए श्रद्धांजलि रखी गई है। सभी देशवासियों से विनम्र निवेदन है कि इस श्रद्धांजलि में अवश्य आएँ और अपनी उपस्थिति से उन दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें।
विनीत
संविधान की कलम
पत्रकार, कल्याण संघ
दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़

