*किरंदुल स्कूल में भीषण गर्मी में बच्चों से भारी बेंच-टेबल व बक्शे ढुलाई! सरकारी आदेश के बावजूद प्रिंसिपल मगरिता टोप्पो ने छोटे बच्चों को धूप में मजदूर बना दिया छात्रों ने छाता लेकर सामान उठाया, तस्वीरें वायरल – प्रशासन की लापरवाही उजागर*
दंतेवाड़ा (19 अप्रैल 2026) – छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी का कहर जारी है। पूरे राज्य में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच गया है। राज्य शासन ने इस भयानक गर्मी को देखते हुए 20 अप्रैल 2026 से सभी स्कूलों की छुट्टी का आदेश जारी कर दिया है। लेकिन दंतेवाड़ा जिले के कुंवाकोंडा ब्लॉक स्थित शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय किरंदुल में प्रिंसिपल मगरिता टोप्पो ने बच्चों को कुछ दिन पहले भीषण गर्मी मे मजदूर बना दिया।
स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे तेज धूप में भारी-भरकम बेंच, टेबल और अन्य सामान उठाकर स्कूल परिसर में ले जा रहे थे। एक तस्वीर में साफ दिख रहा है कि एक बच्चा गर्मी से बचने के लिए छाता लेकर सामान ढो रहा है, जबकि बाकी बच्चे बिना किसी सुरक्षा के लदे-फदे सामान लेकर चल रहे हैं।
ये तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। देखने वालों का खून खौल रहा है। राज्य सरकार ने गर्मी को देखते हुए स्कूल बंद करने का फैसला लिया, लेकिन किरंदुल स्कूल में प्रिंसिपल मगरिता टोप्पो ने बच्चों को कुछ दिन पहले मजदूर बना दिया। छोटे बच्चे, जिनकी उम्र 12 से 16 साल के बीच है, वे भारी सामान उठा-उठाकर स्कूल का काम कर रहे थे।
*प्रशासन की बड़ी लापरवाही*
छत्तीसगढ़ सरकार ने साफ-साफ आदेश दिया है कि 20 अप्रैल से स्कूल बंद रहेंगे। फिर भी कुछ दिनों पहले इस स्कूल में बच्चों से इतना कठिन शारीरिक काम कराया जा रहा था। गर्मी में लू लगने, डिहाइड्रेशन और अन्य बीमारियों का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन प्रिंसिपल ने बच्चों की सुरक्षा की कोई चिंता नहीं की।
*शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं*
*बच्चों से भारी सामान उठवाना क्या बाल श्रम नहीं है?*
स्थानीय लोग और अभिभावक इस घटना पर आक्रोशित हैं। एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमारे बच्चे पढ़ने जाते हैं, मजदूरी करने नहीं। इतनी तेज गर्मी है, फिर भी प्रिंसिपल बच्चों को धूप में काम करा रही हैं। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
*शिक्षा अधिकारों का उल्लंघन*
यह मामला सिर्फ एक स्कूल की लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। RTE एक्ट और बाल अधिकार संरक्षण कानून के तहत बच्चों को किसी भी प्रकार के शारीरिक शोषण या भारी काम से बचाया जाना चाहिए। लेकिन किरंदुल स्कूल में प्रिंसिपल ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
प्रशासन अब क्या करेगा?
इस घटना के बाद जिला शिक्षा अधिकारी, कलेक्टर और राज्य शिक्षा विभाग पर दबाव बढ़ गया है। वायरल तस्वीरों के बाद अब कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है। अगर तुरंत संज्ञान नहीं लिया गया तो यह मामला राज्य स्तर पर बड़ा मुद्दा बन सकता है।
यह घटना छत्तीसगढ़ के दूरदराज के आदिवासी इलाके दंतेवाड़ा की सच्चाई बयां करती है। जहां गर्मी का प्रकोप चरम पर है, वहां भी स्कूल प्रशासन बच्चों की जान जोखिम में डालने पर आमादा है। प्रिंसिपल मगरिता टोप्पो की इस हरकत ने न सिर्फ स्कूल की छवि खराब की, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग कितनी जल्दी इस मामले में संज्ञान लेता है और दोषी प्रिंसिपल के खिलाफ सख्त कार्रवाई करता है। वरना कल कोई और स्कूल, कोई और बच्चा इसी गर्मी में सामान ढोते नजर आएगा।

