*किरंदुल में पानी का संकट, नगरपालिका की नींद और स्कूली बच्चों का जज्बा! भीषण गर्मी में सूख गए कंठ, 18 वार्डों में अब तक एक भी सार्वजनिक प्याऊ नहीं लगा*

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*किरंदुल में पानी का संकट, नगरपालिका की नींद और स्कूली बच्चों का जज्बा! भीषण गर्मी में सूख गए कंठ, 18 वार्डों में अब तक एक भी सार्वजनिक प्याऊ नहीं लगा*

किरंदुल (दंतेवाड़ा), 19 अप्रैल 2026 – कुबेर नगरी के नाम से मशहूर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले का किरंदुल नगरपालिका क्षेत्र इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। सूरज की तपिश इतनी तेज है कि सड़कें तवे की तरह जल रही हैं और पानी के स्रोत सूख चुके हैं। लेकिन सबसे दर्दनाक सच्चाई यह है कि जहां हर गर्मी मे नगरपालिका द्वारा सभी 18 वार्डों में सार्वजनिक प्याऊ (पानी के स्टॉल) लगाए जाते थे, वहां इस बार अप्रैल खत्म होने को है और अब तक कहीं एक भी प्याऊ नजर नहीं आ रहा है।

राहगीरों के गले सूख रहे हैं, प्यास से बेहाल लोग आसमान की ओर ताक रहे हैं – या तो बारिश बरसे या फिर नगरपालिका जागे। लेकिन नगरपालिका की तरफ से अब तक कोई पहल नहीं हुई।

*वहीं एक सकारात्मक तस्वीर भी है जो दिल छू लेती है।*

डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, किरंदुल के स्काउट एंड गाइड के छात्र-छात्राओं ने स्कूल की तरफ से अपने स्कूल के ठीक सामने एक सार्वजनिक प्याऊ का स्टॉल लगा दिया है। स्कूली बच्चे दिनभर प्यासे राहगीरों, मजदूरों, दोपहिया वाहन चालकों और आम नागरिकों को ठंडा पानी पिला रहे जिसने स्वय नगरपालिका अध्यक्ष अपनी प्यास बुझा रही हैं। इस पहल की चारों ओर तारीफ हो रही है। लोग कह रहे हैं – “स्कूल के बच्चे जो काम कर रहे हैं, वो नगरपालिका को करना चाहिए था।”

पिछले वर्षों में नगरपालिका की यह व्यवस्था एक परंपरा बन चुकी थी। गर्मी शुरू होते ही हर वार्ड में प्याऊ लग जाते थे, जिससे राहगीरों को राहत मिलती थी। लेकिन इस साल मार्च से ही भीषण गर्मी और पानी की कमी ने सिस्टम को चकनाचूर कर दिया। नतीजा – अप्रैल बीत चुका है, प्याऊ कहीं नहीं।

जनता में गुस्सा और निराशा

स्थानीय लोगों का कहना है, “हर साल की तरह इस बार भी उम्मीद थी कि नगरपालिका समय रहते प्याऊ लगा देगी। लेकिन अब लग रहा है कि प्रशासन सोया हुआ है।” कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि अगर स्कूल के बच्चे आगे नहीं आते तो प्यासे राहगीरों की हालत और खराब हो जाती।

यह घटना सिर्फ पानी की कमी की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की कमी की भी तस्वीर पेश करती है। एक ओर जहां कुबेर नगरी की पहचान समृद्धि और विकास की रही है, वहीं गर्मी के इस प्रकोप में नागरिक सुविधाओं की अनदेखी सवाल खड़े कर रही है।

स्कूली बच्चों का यह जज्बा मिसाल है

डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल के स्काउट एंड गाइड छात्रों ने साबित कर दिया कि छोटी-छोटी पहल भी बड़ी राहत बन सकती है। उनकी इस मुहिम ने न सिर्फ राहगीरों की प्यास बुझाई, बल्कि पूरे किरंदुल में सामाजिक जिम्मेदारी का एक अनोखा उदाहरण पेश किया है।

अब सवाल यह है – नगरपालिका कब जागेगी? क्या बारिश का इंतजार करना ही एकमात्र विकल्प बचा है? या फिर प्रशासन तुरंत सभी 18 वार्डों में प्याऊ लगाकर राहगीरों की प्यास बुझाएगा?

किरंदुल की गर्मी अब सिर्फ मौसम की नहीं, प्रशासनिक लापरवाही की भी कहानी बन चुकी है।

जनता इंतजार कर रही है – कब आएगा वह प्याऊ, जो हर साल की तरह राहत बनेगा।

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