*किरंदुल (दंतेवाड़ा): किरंदुल की राजनीति में तूफान खड़ा कर देने वाला घटनाक्रम सामने आया है। विधायक प्रतिनिधि शैलेन्द्र सिंह के इस्तीफे ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस शिविर में खुशी की लहर दौड़ गई है, जबकि भाजपा में खलबली मची हुई है। कांग्रेस कार्यकर्ता इसे इस्तीफा नहीं, बल्कि अपनी शिकायत का असर बता रहे हैं।*
कांग्रेस का दावा – बदनामी के डर से इस्तीफा
2 अप्रैल 2026 को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी किरंदुल ने जिला कलेक्टर दंतेवाड़ा को शापित ज्ञापन सौंपकर विधायक प्रतिनिधि की नियुक्ति पर आपत्ति दर्ज की थी। छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन विभाग के आदेश का हवाला देते हुए कांग्रेस ने इसे नियम-विरुद्ध बताया और नियुक्ति निरस्त करने की मांग की थी।
सूत्र बताते हैं कि शिकायत का इतना दबाव बना कि नियुक्ति रद्द होने से पहले ही शैलेन्द्र सिंह को बदनामी के भय से इस्तीफा देना पड़ा। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र मृणाल राय ने कहा,
“यह हमारी सही लड़ाई और एकजुटता की जीत है। नियम विरुद्ध नियुक्ति के खिलाफ हमारा ज्ञापन इतना प्रभावी साबित हुआ कि इस्तीफा देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।”
भाजपा में घर का भेदी?
दूसरी ओर, भाजपा के अंदर भी चर्चा गरम है। सूत्रों का दावा है कि भाजपा के ही 5 से 7 कार्यकर्ता पिछले दिनों कांग्रेस के साथ गुप्त बैठकों में लगे हुए थे। इनकी “मन की इच्छा” पूरी हो गई है और वे इस इस्तीफे से खुश नजर आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब यह उठ रहा है कि जिला कलेक्टर को नियुक्ति निरस्त करने के लिए जो दो आवेदन संजय सोनी (किरंदुल चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष) और राजप्रसाद (सचिव) के नाम से दिए गए, वे आखिर किसने दिए? दोनों नेताओं ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उन्होंने कोई शिकायत या आवेदन नहीं किया। फिर उनके नाम का इस्तेमाल क्यों हुआ?
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक पूछ रहे हैं – क्या भाजपा के ही कुछ लोग “घर का भेदी लंका ढा रहे” हैं? क्या ये 5-7 कार्यकर्ता अपने ही पार्टी के नेता की बदनामी कराने में लगे थे? क्या कांग्रेस से मिलकर उन्होंने यह खेल रचा?
अब सवाल BJP नेतृत्व पर
भाजपा नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या वे इन 5 से 7 भेदियों को पार्टी से बाहर निकालकर सख्त कार्रवाई करने में सफल होंगे? या फिर यह आंतरिक खेल जारी रहेगा?
किरंदुल चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष संजय सोनी और सचिव राजप्रसाद ने फिर दोहराया कि उन्होंने कलेक्टर को कोई आवेदन नहीं दिया। उन्होंने कहा, “हमारे नाम का गलत इस्तेमाल किया गया है। हम इसकी निंदा करते हैं।”
इस पूरे प्रकरण ने किरंदुल की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। एक तरफ कांग्रेस अपनी जीत का जश्न मना रही है तो दूसरी तरफ भाजपा में घरेलू कलह साफ नजर आ रही है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और भाजपा जिला नेतृत्व पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और असली सच्चाई क्या सामने आती है।
राजेंद्र मृणाल राय ने अंत में कहा,
“कांग्रेस एकजुट है और नियमों की रक्षा के लिए हम लगातार लड़ते रहेंगे। जनता अब साफ देख रही है कि कौन सही पक्ष पर है।”
किरंदुल की यह राजनीतिक जंग अब केवल एक पद के इस्तीफे तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्थानीय स्तर पर सत्ता और प्रतिसत्ता के बीच गहरे खेल की तस्वीर बन गई है।

