*किरंदुल नगरपालिका में अस्थाई दखल शुल्क 2026-27 की निविदा! एक ही बंद लिफाफे में सुनील कुमार गुप्ता के दो अलग-अलग आवेदन – अलग-अलग दरें, गुमराह करने की मंशा?*

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*किरंदुल नगरपालिका में अस्थाई दखल शुल्क 2026-27 की निविदा! एक ही बंद लिफाफे में सुनील कुमार गुप्ता के दो अलग-अलग आवेदन – अलग-अलग दरें, गुमराह करने की मंशा?*

किरंदुल (दंतेवाड़ा), 7 अप्रैल 2026 – किरंदुल नगरपालिका में अस्थाई दखल शुल्क (टोल/एंट्री फीस) की साल 2026-27 की निविदा प्रक्रिया खुलते ही सुनील कुमार गुप्ता का नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व निविदा 2025-26 में अवैध वसूली के आरोपों में घिरे सुनील कुमार गुप्ता ने इस बार भी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक ही सील बंद लिफाफे में दो अलग-अलग आवेदन फॉर्म जमा किए, जिनमें दो अलग-अलग दरें दर्शाई गई हैं। यह घटना न सिर्फ निविदा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि नगरपालिका और अन्य बोलीदाताओं को जानबूझकर गुमराह करने की मंशा साफ झलक रही है।

क्या है पूरा मामला?

नगरपालिका मुख्य अधिकारी ने पहले ही स्पष्ट घोषणा कर दी थी कि यदि निविदा खोलने के बाद साहिल छालीवाल और सुनील कुमार गुप्ता की बोली अस्थाई दखल शुल्क प्राप्त करने की स्थिति में रहती है, तो यह मामला नगरपालिका परिषद की सामान्य बैठक में रखा जाएगा। बैठक तय करेगी कि निविदा को पारित किया जाए या निरस्त। लेकिन सुनील कुमार गुप्ता ने इस घोषणा से पहले ही अपनी निविदा को पूरी तरह विवादित बना दिया।

एक ही लिफाफे में दो आवेदन फॉर्म भरकर अलग-अलग दरें डालना न सिर्फ निविदा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि अन्य ईमानदार बोलीदाताओं के साथ धोखा भी है। इससे लगता है कि सुनील कुमार गुप्ता पिछले साल की तरह इस बार भी “कुछ भी करके” काम हासिल करने की कोशिश में लगे हैं।

पिछले साल का साया अब भी मंडरा रहा है

2025-26 की निविदा में साहिल छालीवाल के कार्यों में सुनील कुमार गुप्ता का नाम अवैध वसूली से सीधे जुड़ा हुआ था। अब उसी मंशा के साथ उन्होंने इस साल भी दोहरी रणनीति अपनाई है। नगरपालिका के अधिकारी और पार्षदों को गुमराह करने के साथ-साथ उन सभी लोगों को भी धोखा देने की कोशिश की गई है जिन्होंने ईमानदारी से एक ही दर के साथ सही तरीके से निविदा भरी थी।

अच्छी खबर यह है कि विवाद समय रहते सामने आ गया!

हालांकि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन सकारात्मक पहलू यह है कि निविदा सभी की समक्ष खुलते ही यह गड़बड़ी उजागर हो गई। इससे साबित होता है कि किरंदुल नगरपालिका में अब पारदर्शिता और जागरूकता बढ़ रही है। अगर नगरपालिका परिषद इस मामले को गंभीरता से ले और सुनील कुमार गुप्ता की दोनों बोली को तुरंत निरस्त कर दे, तो यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक मिसाल बनेगा कि “कोई भी नियम तोड़कर निविदा नहीं हथिया सकता”।

नगरपालिका मुख्य अधिकारी, पार्षदगण और आम जनता अब इस विवाद पर नजर रखे हुए हैं। अगर सामान्य बैठक में इस सुनील कुमार गुप्ता की निविदा को रद्द कर और पिछले निविदा मे अवैध वसूली के लिऐ जांच कर कारवाही की जाती है, तो यह ईमानदार ठेकेदारों के लिए राहत और नगरपालिका की विश्वसनीयता के लिए बड़ी जीत होगी।

किरंदुल नगरपालिका के नागरिकों की मांग है –

“निविदा प्रक्रिया को साफ-सुथरा रखो, गुमराह करने वालों पर सख्त कार्रवाई करो!”

यह विवाद सिर्फ एक निविदा का नहीं, बल्कि शासन की ईमानदारी का मुद्दा बन गया है। अब देखना होगा कि नगरपालिका परिषद क्या फैसला लेती है। हम लगातार इस खबर पर नजर रखे हुए हैं।

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