*किरंदुल का ‘हादशों का चौक’: एनएमडीसी की बस ने बुजुर्ग महिला को कुचला, तीन साल में दर्जनों हादसे, अव्यवस्था और लापरवाही का खौफनाक सिलसिला जारी – जिम्मेदार संस्थाएं अब भी सो रही हैं!*

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*किरंदुल का ‘हादशों का चौक’: एनएमडीसी की बस ने बुजुर्ग महिला को कुचला, तीन साल में दर्जनों हादसे, अव्यवस्था और लापरवाही का खौफनाक सिलसिला जारी – जिम्मेदार संस्थाएं अब भी सो रही हैं!*

किरंदुल (दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़), 19 जनवरी 2026: किरंदुल का वह चौक, जो कभी एनएमडीसी की ऐतिहासिक उपलब्धियों और ओवरब्रिज निर्माण का गौरवशाली प्रतीक था, आज ‘हादसों का काला अड्डा’ बन चुका है। यहां हर दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं, लेकिन एनएमडीसी प्रबंधन और नगरपालिका प्रशासन की क्रूर उदासीनता ने इंसानी जानों को सस्ता करार दे दिया है। तीन सालों में कम से कम तीन बड़े हादसे और 8 से 10 छोटे-मोटे हादसे दर्ज हो चुके हैं – ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि परिवारों के टूटने की दर्दनाक कहानियां हैं। फिर भी, जिम्मेदारों की नींद में कोई खलल नहीं पड़ रहा!

आज की ताजा घटना ने एक बार फिर सबको झकझोर दिया। एक बुजुर्ग महिला, जो उम्र के बोझ तले डंडे के सहारे चलती थी, एनएमडीसी की बस के चपेट में आ गई। बस से उसके पैर को बुरी तरह घायल कर दिया। खून से लथपथ हालत में उसे तुरंत एनएमडीसी परियोजना अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की मेहनत से वह फिलहाल खतरे से बाहर है। लेकिन सवाल यह है – क्या यह आखिरी हादसा होगा? या फिर एनएमडीसी की बसें और वाहन यहां मौत बांटते रहेंगे?

इस चौक की बदहाली की जड़ें गहरी हैं। एनएमडीसी का ओवरब्रिज निर्माण कार्य जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन इसका एक पिलर ठीक चौक से सटा हुआ है। इससे विपरीत दिशा से आने वाले वाहन अचानक सामने आ जाते हैं, और ड्राइवर को ब्रेक लगाने का मौका तक नहीं मिलता। नतीजा? बार-बार टक्करें, चोटें और हादसे । एनएमडीसी के क्षेत्र में होने के बावजूद, कंपनी के वाहनों से ही तीन बड़े हादसे हो चुके हैं, और कर्मचारियों के निजी वाहनों से चार और। फिर भी प्रबंधन की तरफ से कोई सख्त सुरक्षा उपाय नहीं। क्या एनएमडीसी को लगता है कि उसके कर्मचारी और स्थानीय लोग सिर्फ मशीनें हैं, जिनकी जान की कोई कीमत नहीं?

अव्यवस्था का दूसरा चेहरा और भी खतरनाक है। चौक के आसपास अस्थाई व्यापारियों ने मछली, चिकन, सब्जी और अन्य दुकानें सड़क पर ही ठोंक दी हैं। कुछ लोग तो डीएवी स्कूल के ठीक मुख्य रोड पर दुकानें सजा बैठे हैं! पैदल चलने वालों के लिए जगह नहीं बची, वाहन जाम में फंसते हैं, और हादसे तो रोज की बात हो गई। नगरपालिका प्रशासन की आंखें बंद हैं – अवैध अतिक्रमण पर कोई कार्रवाई नहीं, कोई चेकिंग नहीं, कोई जुर्माना नहीं। क्या नगरपालिका किरंदुल को बाजार की तरह बेच रही है, जहां दुकानदारों की सुविधा इंसानी जानों से ज्यादा महत्वपूर्ण है?

और सबसे शर्मनाक हिस्सा ओवरब्रिज के नीचे का। यहां कुछ आदिवासी ग्रामीणों ने अपना डेरा जमा लिया है। ये लोग अक्सर शराब के नशे में धुत रहते हैं। कई बार तो नशे में चूर होकर सड़क पर ही लेटे मिलते हैं – जैसे मौत को न्योता दे रहे हों। ऐसे में कोई वाहन आकर टकरा जाए, तो जिम्मेदारी किसकी? एनएमडीसी प्रबंधन की, जो अपने क्षेत्र को सुरक्षित नहीं रख पा रहा, या नगरपालिका की, जो अतिक्रमण और नशे की समस्या पर चुप्पी साधे बैठी है?

स्थानीय निवासियों की चीखें अब बर्दाश्त की सीमा पार कर चुकी हैं। वे कहते हैं – “हम रोज डर के साए में जीते हैं। बच्चे स्कूल जाते हैं, बुजुर्ग बाजार, लेकिन घर लौटने की गारंटी नहीं। एनएमडीसी और नगरपालिका दोनों ही इंसानी खून से खेल रही हैं।” पिछले हादसों में कई परिवार बिखर चुके हैं – कोई बेटा अपाहिज हो चुका, कोई मां-बाप का सहारा। फिर भी कोई जांच, कोई रिपोर्ट, कोई कार्रवाई नहीं। एनएमडीसी, जो देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी है और किरंदुल को औद्योगिक नक्शे पर लाई, आज अपनी ही लापरवाही से यहां दुर्घटना का कारोबार चला रही है।

यह चौक अब सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि एक चेतावनी है – अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो और कितनी जानें जाएंगी? एनएमडीसी प्रबंधन को चाहिए कि:

ओवरब्रिज क्षेत्र में बैरिकेडिंग, साइन बोर्ड और स्पीड ब्रेकर लगाए।

सिविल कार्यालय से लेकर पूरे परिसर तक सफाई और व्यवस्था सुनिश्चित करे।

*नगरपालिका को भी जागना होगा:*

अवैध दुकानों पर तुरंत कार्रवाई करे,

सड़क किनारे अतिक्रमण हटाए।

नशे में धुत लोगों के डेरों को हटाकर पुनर्वास की व्यवस्था करे।

चौक पर सुरक्षा की स्थायी तैनाती करे।

किरंदुलवासियों की मांग साफ है – हादशों का सिलसिला रोका जाए! अगर एनएमडीसी और नगरपालिका अब भी आंखें मूंदे बैठी रहीं, तो यह चौक ‘हादसों का अड्डा’ नहीं, बल्कि ‘लापरवाही का कब्रिस्तान’ बन जाएगा। समय आ गया है जिम्मेदारी निभाने का – वरना इंसानी जानों की कीमत चुकानी पड़ेगी, और वह कीमत बहुत भारी होगी!

 

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