*किरंदुल ब्रेकिंग न्यूज: हरजीत (‘लाली’) का फर्जीवाड़ा बेनकाब! बेवा महिला की संपत्ति लूटने की घिनौनी साजिश, गणेश गुप्ता बने असली मालिक*
किरंदुल (दंतेवाड़ा), 09 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ के किरंदुल में एक शर्मनाक और घिनौना संपत्ति घोटाला सामने आया है, जहां हरजीत उर्फ ‘लाली’ नामक व्यक्ति ने एक बेवा महिला की संपत्ति को अपना बताकर दो निर्दोष खरीदारों को ठग लिया। इस मामले में अब नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है, जहां असली मालिक गीता देवी अपने बेटी के साथ दंतेवाड़ा न्यायालय में हस्ताक्षर कर संपत्ति को गणेश गुप्ता के नाम कर दिया है। हरजीत की यह फर्जी बिक्री पूरी तरह से धोखाधड़ी साबित हुई है, जो एक बेबस विधवा का शोषण कर लाखों की ठगी का घृणित उदाहरण है! ऐसे अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और निर्दोषों की जिंदगियां बर्बाद कर रहे हैं।
मामले की पृष्ठभूमि: ठगी की जड़ें और नया ट्विस्ट
यह घोटाला गणेश गुप्ता और धीरज माकन के बीच चल रहे संपत्ति विवाद से जुड़ा है। हरजीत ने खुद को संपत्ति का मालिक बताते हुए गणेश गुप्ता को 12 लाख और धीरज माकन को 14 लाख रुपये में घर बेच दिया था। लेकिन गीता देवी के सामने आने से खुलासा हुआ कि संपत्ति का असली मालिकाना हक गीता देवी के पास है, जो स्वर्गीय गुलाब सिंह की पत्नी हैं। गीता देवी एक बेवा महिला हैं, जिनकी संपत्ति को हरजीत ने फर्जी तरीके से हथियाने की कोशिश की। यह न सिर्फ धोखाधड़ी है, बल्कि एक कमजोर महिला के खिलाफ संगठित अपराध का घिनौना रूप है, जो समाज की नैतिकता पर कलंक लगाता है।
अब, गीता देवी ने दंतेवाड़ा न्यायालय पहुंचकर वकील बलवंत देशमुख की मौजूदगी में बिक्री दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इससे संपत्ति का मालिकाना हक पूरी तरह से गणेश गुप्ता के नाम हो गया है। पहले की दो बिक्रियां अब पूरी तरह फर्जी साबित हुई हैं, जो हरजीत की ठगी की पोल खोलती हैं। विश्लेषण से साफ है कि हरजीत ने जानबूझकर फर्जी तरीके से मकान मलवा को बचने की कोशिस की , ताकि बेवा महिला की संपत्ति को लूटा जा सके। यह न सिर्फ आर्थिक अपराध है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का क्रूर मजाक है।
विश्लेषण: फर्जीवाड़े की गहराई और कानूनी कमजोरियां
यह मामला संपत्ति घोटालों की एक बड़ी समस्या को उजागर करता है, जहां अपराधी जैसे हरजीत बिना किसी डर के कमजोर लोगों को निशाना बनाते हैं। हरजीत की यह हरकत निंदनीय है – एक बेवा महिला, जो पहले ही पति की मौत से टूट चुकी है, उसकी संपत्ति को अपना बताकर बेचना क्या कम घृणित है?
कड़े शब्दों में कहें तो हरजीत जैसे ठग समाज के लिए जहर हैं, जो निर्दोषों की मेहनत की कमाई लूटते हैं और विधवाओं का शोषण कर अमीर बनते हैं। यह घोटाला दर्शाता है की फर्जी दस्तावेज आसानी से बन जाते हैं, और असली मालिकों को न्याय के लिए अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अगर समय रहते कार्रवाई न हुई, तो ऐसे अपराधी और बढ़ेंगे, और समाज में विश्वास की दीवार ढह जाएगी। गणेश गुप्ता अब असली मालिक हैं, लेकिन धीरक माकन का क्या, जिन्होंने 14 लाख रुपये गंवाए? उन्हें न्याय मिलना चाहिए, और हरजीत को कड़ी सजा – जेल और जुर्माना – ताकि ऐसे घिनौने अपराधों पर लगाम लगे।
आगे क्या? पुलिस और न्याय की मांग
स्थानीय पुलिस को तुरंत हरजीत पर धोखाधड़ी, फर्जी तरीके से बेवा का मकान मलवा बेचने और संपत्ति हड़पने के आरोप में मुकदमा दर्ज करना चाहिए। गीता देवी का साहस सराहनीय है, लेकिन यह घटना महिलाओं के संपत्ति अधिकारों पर सवाल उठाती है। समाज को ऐसे ठगों के खिलाफ एकजुट होना होगा। सी ज़ी संविधान न्यूज़ इस मामले पर नजर रखेगी, और उम्मीद है कि न्याय जल्द होगा। किरंदुल जैसे छोटे शहरों में ऐसे घोटाले बढ़ रहे हैं, और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे सख्ती से निपटें। अन्यथा, यह घृणित सिलसिला जारी रहेगा।

