*दंतेवाड़ा में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण विवाद: गरीबों की टपरियां हटाकर ‘संग संगठन के नाम’ पर दुकान निर्माण का आरोप, प्रशासन ने दी अंतिम चेतावनी*
दंतेवाड़ा, 07 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के कड़मपाल पंचायत में सरकारी नजूल भूमि पर चल रहे अवैध निर्माण को लेकर नया मोड़ आया है। स्थानीय सूत्रों और प्रभावितों का दावा है कि पहले गरीब परिवारों की छोटी-छोटी टपरियां और चिकन शॉप यहां लगी हुई थीं, जिन्हें हटाकर अब कुछ प्रभावशाली लोग ‘समाज के नाम’ पर बड़ी दुकानों का पक्का निर्माण करवा रहे हैं। गरीबों को इस जगह से पूरी तरह भगा दिया गया है और अब उनका यहां कोई हक नहीं बचा है। इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई के दौरान कोडेनार पंचायत के सरपंच और उपसरपंच का हस्तक्षेप भी विवादास्पद रहा।
गरीबों की आजीविका पर संकट: टपरियां हटाकर बड़ा निर्माण
मामले से जुड़े उपसरपंच का कहना है कि यह सरकारी भूमि पहले गरीब परिवारों के लिए जीवनयापन का सहारा थी। यहां छोटे-मोटे व्यवसाय जैसे चिकन दुकानें, टपरियां लगाकर वे गुजारा करते थे। लेकिन अब इन गरीबों को जगह से हटा दिया गया और उनके स्थान पर पांच बड़ी दुकानों का अवैध निर्माण शुरू हो गया। आरोप है कि यह निर्माण ‘संघ संगठन के नाम’ पर किया जा रहा है, लेकिन पीछे कुछ लोगों की निजी साझेदारी है। इससे गरीबों की आजीविका छिन गई और वे बेघर जैसे हो गए हैं।
पहले की जानकारी के अनुसार, कुछ वर्ष पहले अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने इस निर्माण पर रोक लगाई थी और अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया था। बावजूद इसके निर्माण रोका गया पर अब तक हटाया नहीं गया था। हाल ही में तहसीलदार की टीम मौके पर पहुंची और बुलडोजर से कार्रवाई शुरू की, लेकिन कोडेनार पंचायत के सरपंच और उपसरपंच ने इसे रोक दिया। उन्होंने तर्क दिया कि पहले कोडेनार पंचायत से ले कर किरंदुल बस स्टैंड और पूरा किरंदुल तक के अन्य अवैध निर्माणों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उपसरपंच ने तहसीलदार के सामने गरीबों का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें भगाकर बड़ी दुकानें बनाई जा रही हैं। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि इन जनप्रतिनिधियों की खुद इन दुकानों में साझेदारी है, जो पद के दुरुपयोग का गंभीर आरोप है।
प्रशासन की सख्ती: 26 जनवरी तक स्वत: हटाने का अल्टीमेटम
कार्रवाई रोकने के बाद तहसीलदार ने लिखित नोटिस जारी कर 26 जनवरी 2026 तक अतिक्रमण स्वयं हटाने की अंतिम मोहलत दी है। नोटिस में चेतावनी दी गई कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो 27 जनवरी को प्रशासन द्वारा जबरन बुलडोजर चलाया जाएगा और पूरी जिम्मेदारी अतिक्रमणकारियों की होगी। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई जिले में सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने का हिस्सा है।
विश्लेषण: गरीबी का सहारा छिनना और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल
यह घटना आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा क्षेत्र में गरीबों के अधिकारों और विकास के नाम पर हो रहे दुरुपयोग को उजागर करती है। एक तरफ गरीब परिवार छोटे व्यवसायों से जीवन चलाते थे, वहीं दूसरी तरफ उन्हें हटाकर बड़े निर्माण का आरोप गंभीर है। अगर ‘समाज के नाम’ पर निर्माण हो रहा है, तो पारदर्शिता क्यों नहीं? जनप्रतिनिधियों पर साझेदारी के आरोप अगर साबित होते हैं, तो यह लोकतंत्र और पंचायती राज व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन को सभी पक्षों की जांच करनी चाहिए और गरीबों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जैसे सामुदायिक बाजार या स्टॉल आवंटन पर विचार करना चाहिए।
यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण और गरीबों के विस्थापन की समस्या को रेखांकित करता है। आगे की कार्रवाई और जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि गरीबों के हक की अनदेखी हुई, तो यह सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।

