*किरंदुल में एएम/एनएस के बेनिफिसिएशन प्लांट की क्षमता विस्तार: कोई नई भूमि अधिग्रहण नहीं, पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करने का प्रयास*
किरंदुल (दंतेवाड़ा), 28 दिसंबर 2025: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थित किरंदुल के औद्योगिक गतिविधियों को लेकर हाल के दिनों में उठी चर्चाओं और समाचारों के बीच आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया) ने एक स्पष्ट प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्थिति को स्पष्ट किया है। कंपनी ने जोर देकर कहा कि प्रस्तावित क्षमता विस्तार पूरी तरह से मौजूदा बेनिफिसिएशन प्लांट के दायरे में होगा और इसके लिए किसी अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह कदम स्थानीय समुदायों में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में उठाया गया है।
एएम/एनएस इंडिया का किरंदुल बेनिफिसिएशन प्लांट बस्तर के बैलाडिला आयरन ओर माइंस से निकले लौह अयस्क को प्रोसेस करता है। वर्तमान में इस प्लांट की उत्पादन क्षमता 8 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) है, जिसे कंपनी 12 एमटीपीए तक बढ़ाने का प्रस्ताव रख रही है। यह विस्तार मुख्य रूप से कंपनी के विशाखापत्तनम (विजाग) स्थित पेलेट प्लांट के संचालन को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। पेलेट प्लांट स्टील उत्पादन के लिए आवश्यक उच्च गुणवत्ता वाले पेलेट्स बनाता है, जो आगे हजीरा (गुजरात) के मुख्य स्टील प्लांट तक पहुंचाए जाते हैं।
कंपनी के प्रवक्ता ने विज्ञप्ति में स्पष्ट किया कि “यह क्षमता विस्तार संगठन के वर्तमान पेलेट प्लांट संचालन को समर्थन देने के उद्देश्य से प्रस्तावित है। इससे संबंधित सभी गतिविधियां, प्रतिष्ठापन एवं अवसंरचनात्मक विकास कार्य पूरी तरह से मौजूदा संयंत्र परिसर के भीतर ही किए जाएंगे।” सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस विस्तार के लिए किसी नई भूमि की जरूरत नहीं होगी, जो बस्तर जैसे संवेदनशील आदिवासी क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण को लेकर उठने वाली चिंताओं को सीधे संबोधित करती है।
पृष्ठभूमि: एएम/एनएस इंडिया की भारत में विस्तार योजनाएं
एएम/एनएस इंडिया विश्व की दो दिग्गज स्टील कंपनियों – आर्सेलरमित्तल और निप्पॉन स्टील – का संयुक्त उद्यम है, जो 2019 में एस्सार स्टील के अधिग्रहण के बाद भारत में सक्रिय हुई। कंपनी की मुख्य फैक्ट्री गुजरात के हजीरा में है, जहां वर्तमान में 9 एमटीपीए की क्रूड स्टील क्षमता है। कंपनी ने महत्वाकांक्षी विस्तार योजना बनाई है, जिसमें हजीरा की क्षमता को 2026 तक 15 एमटीपीए और आगे 2030 तक 24-40 एमटीपीए तक ले जाने का लक्ष्य है।
इस विस्तार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रॉ मटेरियल की सुरक्षा है। कंपनी अपने आयरन ओर की लगभग 60 प्रतिशत जरूरत कैप्टिव माइंस से पूरी करती है, जबकि शेष थर्ड पार्टी सप्लाई से, मुख्य रूप से एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) से। किरंदुल प्लांट एनएमडीसी के बैलाडिला माइंस से अयस्क प्राप्त करता है और इसे स्लरी पाइपलाइन के माध्यम से विजाग पेलेट प्लांट तक पहुंचाता है। यह 267 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन भारत की सबसे लंबी स्लरी पाइपलाइनों में से एक है।
क्षमता विस्तार से कंपनी को अधिक पेलेट्स उत्पादन करने में मदद मिलेगी, जो स्टील मैन्युफैक्चरिंग की लागत कम करेगा और आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा। कंपनी की समग्र रणनीति में डाउनस्ट्रीम उत्पादों (जैसे ऑटोमोटिव ग्रेड स्टील) पर फोकस है, जिससे आयात निर्भरता घटेगी।
स्थानीय चिंताएं और कंपनी की प्रतिबद्धता
बस्तर क्षेत्र नक्सल प्रभावित और आदिवासी बहुल है, जहां औद्योगिक परियोजनाओं को अक्सर भूमि अधिग्रहण, विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव के कारण विरोध का सामना करना पड़ता है। हाल के समाचारों में किरंदुल में संभावित विस्तार को लेकर ऐसी ही आशंकाएं जताई गई थीं। एएम/एनएस की विज्ञप्ति इन आशंकाओं को दूर करने का स्पष्ट प्रयास है। कंपनी ने कहा कि वह “पारदर्शिता बनाए रखने तथा सभी लागू वैधानिक एवं नियामक आवश्यकताओं का पूर्ण रूप से पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
यह विस्तार मौजूदा परिसर में होने से पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया भी सरल हो सकती है, क्योंकि नई भूमि या वन क्षेत्र प्रभावित नहीं होगा। कंपनी पहले से ही सस्टेनेबिलिटी पर जोर दे रही है, जैसे रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य।
आगे की राह
यह क्षमता विस्तार एएम/एनएस इंडिया की भारत में बढ़ती उपस्थिति का हिस्सा है। कंपनी आंध्र प्रदेश में नए इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट की योजना भी बना रही है और ओडिशा में अतिरिक्त माइंस विकसित कर रही है। किरंदुल विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं, हालांकि कंपनी ने अभी इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया।
स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि कंपनी की पारदर्शिता सराहनीय है, लेकिन वे सभी नियामक अनुपालन की निगरानी करेंगे। कुल मिलाकर, यह कदम कंपनी की जिम्मेदार विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो भारत के स्टील सेक्टर की बढ़ती मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

