*सीजी संविधान न्यूज़ की खबर ने रंग दिखाया: रेवाली स्कूल के लापरवाह हेडमास्टर टीकम साहू को संकुल समन्वयक पद से हटाया, मूल स्कूल में ड्यूटी का आदेश!*
दंतेवाड़ा, 4 दिसंबर 2025: बस्तर के शिक्षा तंत्र में एक बड़ी सेंसरशिप – पत्रकारिता की ताकत ने सिस्टम को झकझोरा
बस्तर के दूरस्थ ग्राम पंचायत रेवाली के माध्यमिक विद्यालय की दर्दभरी कहानी ने आखिरकार प्रशासन की नींद उड़ा दी। सीजी संविधान न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट के बाद, जो पिछले महीने प्रकाशित हुई थी और जिसमें हेडमास्टर टीकम साहू की चार साल में महज 20 दिन की उपस्थिति का खुलासा किया गया था, शिक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई की है। टीकम साहू, जो हीरोली संकुल समन्वयक के पद पर तैनात थे, को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उन्हें उनके मूल पदस्थापन – रेवाली माध्यमिक शाला – पर वापस ड्यूटी करने का आदेश जारी कर दिया गया है।
इसके साथ ही, हीरोली संकुल समन्वयक के पद पर सुरेंद्र साहू की नियुक्ति आज ही कर दी गई है। यह बदलाव न केवल रेवाली के बच्चों के लिए राहत की सांस है, बल्कि पूरे बस्तर के शिक्षा विभाग में जवाबदेही की मिसाल भी कायम करता है।
सीजी संविधान न्यूज़ की रिपोर्ट का ‘बड़ा असर’: कैसे पत्रकारिता ने सिस्टम को मजबूर किया
सीजी संविधान न्यूज़ के संपादक किशोर कुमार रामटेके की अगस्त 2025 में ग्राउंड जीरो रिपोर्ट ने जैसे बस्तर के शिक्षा घोटाले का पर्दाफाश कर दिया था। रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि:
टीकम साहू की 28 फरवरी 2022 को रेवाली में पदस्थापना के बाद वे 46 महीनों में मुश्किल से 20 दिन स्कूल आए।
सहायक शिक्षिका कौसल्या साहू तो मात्र एक दिन ही दिखीं।
हाजिरी रजिस्टर घर पर ले जाकर साइन करवाए जाते थे, जबकि शनिवार-रविवार को भी स्कूल ‘नाममात्र’ चलता था।
सरपंच राकेश कुमार ताती, चपरासी, रसोइया और अन्य शिक्षकों के बयानों से साफ था कि पूरा तंत्र लापरवाही में डूबा हुआ है।
यह रिपोर्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर हंगामा मच गया। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को शिकायतें भेजीं, और संकुल समन्वयक सोनाराम कोर्रम ने भी बीईओ-डीईओ स्तर पर दबाव बनाया। नतीजा? शिक्षा विभाग ने मात्र कुछ हफ्तों में संज्ञान लिया। जिला शिक्षा अधिकारी ने पुष्टि की कि “खबर के प्रकाशन के बाद जांच शुरू हुई, और टीकम साहू की अनुपस्थिति साबित होने पर उन्हें संकुल पद से हटाया गया। सुरेंद्र साहू को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो ईमानदारी से काम करने के लिए जानी जाती हैं।”
सरपंच राकेश कुमार ताती का खुशी भरा बयान:
“सीजी संविधान न्यूज़ ने हमारी आवाज उठाई, वरना ये लापरवाही चलती रहती। अब टीकम साहू को वापस स्कूल भेजा गया है, लेकिन सवाल वही है – क्या वे अब सुधरेंगे? हमारे बच्चों का भविष्य दाँव पर है।”
स्कूल चपरासी का भावुक प्रतिक्रिया:
“अब तो टीकम साहू को पहचानेंगे! न्यूज़ ने कमाल कर दिया। बच्चे अब पढ़ाई पर ध्यान देंगे।”
संकुल समन्वयक सोनाराम कोर्रम:
“खबर ने बीईओ को भी हरकत में ला दिया। पहले ‘जैसे चल रहा है, चलने दो’ कहते थे, अब बदलाव दिख रहा है। सुरेंद्र साहू जैसे जिम्मेदार व्यक्ति की नियुक्ति से संकुल मजबूत होगा।”
ये जीत है, लेकिन सवाल बरकरार: क्या लापरवाह शिक्षकों पर सख्ती होगी?
सीजी संविधान न्यूज़ की यह जीत बस्तर के हर गाँव के लिए मिसाल है। पत्रकारिता ने साबित कर दिया कि सच्चाई की आवाज कभी दबी नहीं रहती। लेकिन असली सवाल अब भी खड़े हैं:
क्या टीकम साहू और कौसल्या साहू जैसे शिक्षकों पर चार साल की अनुपस्थिति के लिए वेतन वसूली होगी? घर बैठे लाखों रुपये की तनख्वाह – ये सरकारी खजाने पर डाका तो नहीं?
क्या ऐसे ‘निकम्मे’ शिक्षकों को नौकरी की ज़रूरत है, या उन्हें बर्खास्त कर ईमानदार उम्मीदवारों को मौका दिया जाए?
बीईओ-डीईओ स्तर पर मिलीभगत की जांच कब होगी? रेवाली जैसे सैकड़ों स्कूलों में ऐसी लापरवाही तो नहीं?
बस्तर को नक्सल-मुक्त और विकासशील बनाने का दावा करने वाली सरकार से उम्मीद है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत हो। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं।
सीजी संविधान न्यूज़ का संकल्प:
हम ऐसी ही खबरों से बस्तर को नई दिशा देंगे। अगर आपके गाँव में भी ऐसी अनियमितता है, तो बताएं – हम पहुँचेंगे!

