लौह नगरी किरंदुल में स्थानीय निकाय के चुनाव सम्पन्न हो चुके है,इसे के साथ शोरगुल भी थम चुका है काफी कुछ नए और दिलचस्प किस्सों के साथ लौह नगरी किरंदुल में प्रथम बार शुल्क लेकर पत्रकारिता दृष्टिगोचर हुई,
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तथाकथित पत्रकार ने चुनावी प्रतिस्पर्धा का भरपूर लाभ उठाते हुए अच्छी खासी कमाई कर ली प्रत्याशियों से पैसे लेकर मनमाने ढंग से उनके पक्ष में निरन्तर समाचार चलाए यह अलग बात है कि जिनके पक्ष में वे समाचार चला रहे थे उन प्रत्याशियों की या तो जमानत जब्त हो गई या वे बुरी तरह परास्त हुए
देखा जाए तो पत्रकारिता जगत में यह कुप्रथा की शुरुआत है लिखने का तात्पर्य है कि नगर के इतिहास में पहले कभी इस तरह धनराशि लेकर समाचार लगाने का कारोबार नहीं रहा किन्तु अब इसकी शुरुआत सज्जन वरिष्ठ पत्रकार द्वारा कर दी गई है,
मुझे यह आभास और भय है कि यह संक्रमण जरूर फैलेगा जो कि पत्रकारिता जगत के लिए कलंक है इन वरिष्ठ पत्रकार ने 10 दिनों तक धुंआधार मनगढ़ंत समाचारों का अंबार उन प्रत्याशियों के पक्ष में लगा दिया जिन्होंने उन्हें मोटी रकम अदा कर दी थी!
देखा जाए तो यह चुनाव आचार संहिता का भी उल्लंघन भी है, दंतेवाडा जिले में पत्रकारिता करना एक दुष्कर कार्य है हमारे कई पत्रकार भाई अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए शहीद भी हो चुके कइयों ने अपना बलिदान दिया है!
नक्सल गढ़ों में जाकर दुस्साहस पूर्वक पत्रकारिता करना बस्तर के पत्रकारों को एक अलग और सम्मान का दर्जा अदा करता है,और वहीं किरंदुल नगर में घर में बैठे बैठे पत्रकारिता कर पैसे बनाने वाले व पत्रकारिता को कलंकित करने वाले उक्त पत्रकार की मैं कड़ी निंदा करता हूं
