B T O A निश्चित रूप से एक समृद्ध संस्था है,धन बल और बाहुबल की इस संस्था को कोई कमी नहीं है
इसका कोष भी कुबेर के खजाने की तरह धन से सराबोर है यही कारण है कि इस पर काबिज होने की प्रतिस्पर्धा अपने आप में एक मिशाल है,लौह नगरी बचेली और किरंदुल ही इसका मुख्य शक्ति केंद्र हैं
इसके धन बल और राजनैतिक प्रभाव को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है,यदा कदा इसके उदाहरण भी परिलक्षित होते रहते हैं,किन्तु इन सब के बावजूद इनका नगर के विकास में या नगर की जनता के हित में कोई योगदान नहीं है अपितु यह संस्था नगर के लोगों के लिए परेशानी का सबब है और यदि बिना लाग लपेट के कहा जाए तो इस संस्था के कारण लोगों का जीना हराम हो चुका है,
इनके भारी भरकम वाहनों से उड़ने वाले लौह चूर्ण से जनता त्रस्त हो चुकी है लेकिन यह संस्था कभी पानी का छिड़काव नहीं करती इनके वाहनों से फैलने वाले प्रदूषण और धूल झेलना आम नागरिकों की विवशता है क्योंकि इनके विरुद्ध की गई कोई भी शिकायत इनके प्रभाव के सामने विफल,असफल है
इस संस्था का दूसरा योगदान यह है कि इनकी भारी भरकम वाहन पूरे नगर में यत्र तत्र सर्वत्र मुख्य मार्ग और गौरव पथ पर कब्जा किए खड़े रहते हैं और दुर्घटनाओं को सीधा आमंत्रण देते रहते हैं किन्तु स्थानीय निकाय और प्रशासन इस पर चुप्पी साधे रहता है
,जबकि यह अस्थाई दखल के अंतर्गत आने वाला विषय है किन्तु यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है और न कोई नवीन बात है वर्षों से यही होता आया है चूंकि जहां धन बल होता है,समस्त शासकीय बल भी उसी तरफ होता है,इसका ज्वलंत प्रमाण उस वक्त सामने आया जब BTOA ने एक पत्र स्थानीय निकाय को लिख कर शहर के मुख्य बाजार के मुहाने से निकले मार्ग को खाली कराने की अपील की तत्काल पूरा अमला और सिस्टम काम पर लग गया आनन फानन में उक्त मार्ग को अतिक्रमण रहित कर दिया गया,और अब संस्था के वाहन बड़े मजे से प्रदूषण फैलते और धूल उड़ाते उक्त मार्ग पर शान से विचरण करते हैं तब बुजुर्ग की एक कहावत चरितार्थ हो जाती की “चोरी और सीनाजोरी” अब कौन बिल्ली के गले में घंटी बांधने जाए कि थोड़ा रहम तो करो कम से कम उक्त मार्ग पर पानी का छिड़काव ही करा दो,सच बड़ा कड़वा होता है और बहुतों को मेरा यह लेख आहत करेगा लेकिन मेरी फितरत भी सत्य के साथ खड़ी होने की है और मैं आईना दिखाता ही रहूंगा।

