छत्तीसगढ़ मे हल सष्ठी 2 सितंबर को बन रहे 3 शुभ योग,जानें पूजा सामग्री,
विधि और व्रत के नियम।
श्री अखिलेश तिवारी की
खास रिपोर्ट।
रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर मे हिंदू
धर्म में हल छठ या हल षष्ठी का विशेष महत्व माना जाता है।
यह पर्व हर वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है।
इसे अलग-अलग क्षेत्रों में हरछठ,ललई छठ और
बलराम जयंती के नाम
से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण
के बड़े भाई और शेषनाग
के अवतार माने जाने वाले भगवान बलराम का जन्म हुआ था।
उनका प्रमुख अस्त्र हल था।
इसलिए इस पर्व का नाम
हल षष्ठी पड़ा।
हल छठ के दिन माताएं अपनी संतान की लंबी
आयु,अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना
से व्रत रखती हैं।
कई जगह संतान की इच्छा रखने वाली महिलाएं भी
संतान प्राप्ति की कामना
से यह व्रत करती हैं।
इस दिन खेती और कृषि से जुड़ी चीजों का विशेष महत्व होता है।
इस बार हल छठ के दिन तीन शुभ योगों का संयोग भी बन रहा है।
उदया तिथि के अनुसार हरछठ का व्रत 2 सितंबर 2026।
बुधवार को रखा जाएगा।
कब है हरछठ।
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 2 सितंबर 2026 को
सुबह 6 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी और 3 सितंबर को
सुबह 4 बजकर 25 मिनट
पर समाप्त होगी।
उदया तिथि के अनुसार हरछठ का व्रत 2 सितंबर
2026।
बुधवार को रखा जाएगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार।
यह पर्व जन्माष्टमी से दो दिन पहले मनाया जाता है।
हल छठ को विशेष रूप से संतान की सुख-समृद्धि
और परिवार की खुशहाली
से जोड़कर देखा जाता है।
हरछठ पर बनेंगे 3 शुभ योग
इस वर्ष हल छठ का दिन शुभ योगों के संयोग से खास माना जा रहा है।
पंचांग के अनुसार,इस दिन ध्रुव योग का निर्माण होगा।
जो सुबह से लेकर रात 9 बजकर 12 मिनट तक
रहेगा।
इसके बाद व्याघात योग
शुरू होगा।
जो पूरी रात तक रहेगा।
इसके अलावा तिथि और नक्षत्र के संयोग को भी
पूजा-पाठ के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऐसे में हल छठ पर विधि विधान से पूजा करने और
संतान की मंगलकामना
करने का विशेष महत्व
रहेगा।
हरछठ पूजा सामग्री की
पूरी लिस्ट
भैंस का दूध,दही और घी
भैंस का गोबर
महुआ के फल,फूल और पत्ते
ऐपण
मिट्टी के छोटे कुल्हड़
ज्वार की धानी
मिट्टी की मटकी
देवली-छेवली
पसही चावल या तालाब
में उगा चावल
भुना हुआ चना
घी में भुना हुआ महुआ
धान का लावा
सात प्रकार के अनाज
लाल चंदन
हल्दी
नया वस्त्र
जनेऊ
कुश
मिट्टी का दीपक
इस तरह करें हरछठ की
पूजा व्रती महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं।
परंपरा के अनुसार महुए की दातून से दांत साफ करने के
बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है।

