नगरपालिका किरंदुल में बयान-पत्र में छेड़छाड़ और खुला पक्षपात!
*अस्थाई दखल शुल्क के शिकायतकर्ता के बयान पर अधिकारी-पार्षदों के हस्ताक्षर, आरोप लगे ठेकेदार के बयान पर सिर्फ ग़ैर-सरकारी हस्ताक्षर — क्या चल रहा है किरंदुल में? मुख्य अधिकारी पूरी तरह लाचार या संलिप्त?*
किरंदुल (दंतेवाड़ा) — नगरपालिका किरंदुल का प्रशासन एक बार फिर विवादों के घेरे में है। अस्थायी दखल शुल्क मामले में अब बयान-पत्रों में फेरबदल और दोहरे नियम का गंभीर आरोप लगा है। शिकायतकर्ता और ट्रक ड्राइवरों के बयान में तो सभी सरकारी औपचारिकताएं पूरी की गईं, लेकिन आरोप लगे ठेकेदार पक्ष का बयान देखकर सवाल उठ खड़े हुए हैं कि क्या नगरपालिका में न्याय दो हिस्सों में बंटा हुआ है?
पूरा मामला क्या है?
ट्रक ड्राइवर निजाम हुसैन (गाड़ी नंबर GJ-23-4-6926, थाना मिलीडर, उत्तर प्रदेश) और अशोक (गाड़ी GJ-23-AW-0988, रीवा, मध्य प्रदेश) ने स्पष्ट बयान दिया कि:
सुनील गुप्ता ने उन्हें 50 रुपये का रसीद देकर 250 रुपये का रसीद बनाया।
ड्राइवरों द्वारा ऑनलाइन पेमेंट किए जाने अस्थाई दखल शुल्क के नाम पर अतिरिक्त वसूली की गई।
सुनील गुप्ता द्वारा यह गड़बड़ी की गई।
शिकायतकर्ता दिलीप सिंह और ट्रक ड्राइवरो ने तुरंत जांच तथा निविदा निरस्त करने की मांग की थी।
पक्षपात का खुला खेल
पहला बयान (शिकायतकर्ता पक्ष):
दिलीप सिंह और दोनों ट्रक ड्राइवरों का बयान नगरपालिका राजस्व अधिकारी द्वारा लिया गया। इस दस्तावेज पर:
शिकायतकर्ता,
2 ट्रक ड्राइवर,
2 पार्षद,
3 नगरपालिका अधिकारियों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
दूसरा बयान (आरोप लगे आरोपी ठेकेदार पक्ष):
साहिल छालीवाल और उनके सहयोगियों का बयान पूरी तरह अलग है। इस बयान-पत्र में:
नगरपालिका के किसी भी अधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है।
ठेकेदार के हस्ताक्षर के साथ अन्य 4 लोगों के हस्ताक्षर हैं।
पूरा दोनों बयान एक ही व्यक्ति की लिखावट में है, जबकि साहिल छालीवाल वाले बयान मे तीन अन्य नाम दूसरे व्यक्ति द्वारा लिखे गए हैं — जो साफ तौर पर छेड़छाड़ की ओर इशारा करता है।
बड़े सवाल जो मुख्य अधिकारी को घेर रहे हैं:
क्या नगरपालिका किरंदुल में शिकायतकर्ता और आरोप लगे आरोपी के लिए बयान दर्ज करने के नियम अलग-अलग हैं?
आरोप लगे आरोपी पक्ष के बयान पर सरकारी अधिकारियों के हस्ताक्षर गायब क्यों?
बयान-पत्र में लिखावट और हस्ताक्षरों में फेरबदल किसके इशारे पर हुआ?
50 रुपये के रसीद को 250 रुपये में बदलने वाला घोटाला कौन कर रहा है और क्यों छिपाया जा रहा है?
इसका सूत्रधर कौन इसका खुलाशा कब होगा आखिर जांच क्यों नहीं की जा रही है क्या इस पुरे मामले मे पूरा नगरपालिका अमला तो शामिल नहीं है
स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है। लोग पूछ रहे हैं — क्या नगरपालिका किरंदुल सभी के लिए एक समान संविधान मानती है या यहां ठेकेदारों और राजनीति की चलती है? मुख्य अधिकारी का अब तक चुप रहना उनकी लाचारी या संलिप्तता दोनों की ओर इशारा कर रहा है।
जनता का सवाल:
नगरपालिका मुख्य अधिकारी साहब, क्या आप इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच करवाएंगे या फिर इस बार भी फाइलें दबा दी जाएंगी? समय आ गया है जवाब देने का है

