*किरंदुल नगरपालिका में सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़! उल्टा चोर कोतवाल को डांटे? ठेकेदार बयान में हस्ताक्षर और नामों की गड़बड़ी, जांच अधिकारी कौन?*

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*किरंदुल नगरपालिका में सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़! उल्टा चोर कोतवाल को डांटे? ठेकेदार बयान में हस्ताक्षर और नामों की गड़बड़ी, जांच अधिकारी कौन?*

किरंदुल (दंतेवाड़ा), 16 जुलाई 2026 – नगरपालिका परिषद किरंदुल में अस्थाई दखल शुल्क वसूली के ठेके से जुड़े अवैध वसूली के मामले में बड़ा घोटाला सामने आया है। सूचना का अधिकार (RTI) और प्रथम अपील के तहत मिले दस्तावेजों से पता चला है कि सरकारी बयान पत्र में छेड़छाड़ की गई है। पूरा बयान एक हाथ का लिखा, लेकिन नाम और हस्ताक्षर अलग-अलग व्यक्तियों के। पत्रकार दिलीप सिंह और किशोर कुमार द्वारा पर्दाफाश किए गए इस मामले में मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) पर सवाल उठ रहे हैं।

पूरा मामला क्या है?

 

दिनांक 01/04/2026 को श्री दिलीप सिंह (निवासी किरंदुल) ने  नगरपालिका किरंदुल कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। ठेकेदार साहिल छालीवाल पर आरोप था कि उनके स्टाफ/एजेंट सुनील कुमार गुप्ता ने 50 रुपये की रशीद पर्ची मे 250 रुपये वसूले। दो वाहनों के नंबर भी दिए गए – GJ 234 6926 (निजाम हुसैन) और GJ 23 AW 0988 (ड्राइवर अशोक)। दिलीप सिंह ने निष्पक्ष जांच, निविदा रद्द करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

जांच के दौरान:

सारित छालीवाल (संभवतः ठेकेदार पक्ष) ने कहा – “हमारे स्टाफ ने ज्यादा पैसे नहीं वसूले, पर्ची से छेड़छाड़ दिलीप सिंह और ड्राइवरों ने की होंगी होगी।”

सुनील गुप्ता ने दावा किया – पहले धमकी मिली थी,की कमिसन दो अन्यथा?  ड्राइवरो ने सुनील गुप्ता के निजी बैंक खाता मे ऑनलाइन पैसे डाले, 200 रुपये । सुनील गुप्ता का बयान है की वो ऑनलइन पैसे की कहानी झूटी है पत्रकार अन्य लोग और दिलीप सिंह उनकी छवि खराब कर रहे हैं।

लेकिन असली बम तो बयान के दस्तावेज पर फूटा। RTI से सामने आया:

बयान में 5 लोगों के नाम और हस्ताक्षर।

नगरपालिका अधिकारी द्वारा लिऐ गये बयान जो की नगरपालिका की शासकीय दस्तावेज है पूरा पेपर एक हाथ का लिखा हुआ है साहिल छालीवाल और सुनील गुप्ता का नाम भी नगरपालिका के जांच अधिकारी द्वारा ही लिखा गया प्रतीत हो रहा है लेकिन इस नगरपालिका के सरकारी पेपर बयान कॉपी मे अन्य 3 लोगो के नाम कैसे आये किसी दूसरे द्वारा नाम लिखा गया नाम व दस्तखत कैसे आया सवाल ये की नगरपालिका द्वारा साहिल छालीवाल ठेकेदार को ही बयान के लिऐ बुलाया गया था तो अन्य नाम व हस्ताक्षर कैसे दर्ज हुऐ

हस्ताक्षर भी संदिग्ध।

जांच अधिकारी का नाम/हस्ताक्षर स्पष्ट नहीं, CMO के हस्ताक्षर की जगह अन्य नाम।

पत्रकारों ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी से ये जानकरी चाहते है : की सरकारी दस्तावेज में छेड़छाड़ किसके इशारे पर हुई? ठेकेदार का बयान सरकारी रिकॉर्ड है या कोई भी अन्य इसमें छेड़छाड़ कर सकता है । क्या नगरपालिका संविधान और कानून से चलती है या बाहरी लोगों के इशारे पर?

लागू नियम और कानून – नगरपालिका की जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 (Chhattisgarh Municipalities Act, 1961) के तहत:

मुख्य नगरपालिका अधिकारी (Chief Municipal Officer) मुख्य कार्यकारी अधिकारी है। शिकायतों की जांच, निविदा प्रक्रिया, दस्तावेजों की अखंडता उनकी जिम्मेदारी है (Section 87 और संबंधित प्रावधान)।

सरकारी रिकॉर्ड (बयान, जांच रिपोर्ट) में छेड़छाड़ IPC Section 465, 466 (Forgery of record of Court or public register), Section 468, 471 के तहत दंडनीय अपराध है। सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए सख्त प्रावधान हैं।

जांच अधिकारी नियुक्त करने के बाद उसकी रिपोर्ट और दस्तावेज पारदर्शी और tamper-proof होने चाहिए। CMO को सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई बाहरी दबाव या हेराफेरी न हो।

सवाल CMO से:

जांच अधिकारी कौन था? उसका बयान/हस्ताक्षर कहां?

दस्तावेज में 5 हस्ताक्षर और अलग हाथ कैसे?

अवैध वसूली पर क्या कार्रवाई हुई?

जनता और पत्रकारों की मांग

यह मामला न सिर्फ अवैध वसूली बल्कि सरकारी दस्तावेज से छेड़छाड़ को उजागर करता है। बुजुर्ग कहावत “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” यहां सटीक बैठती है। पत्रकार दिलीप सिंह और किशोर कुमार ने निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन उन पर ही आरोपों का ठीकरा फोडा जा रहा है इस पुरे मामले मे तीसरी आंख भी जनता को सचाई दिखाने मे नाकाम साबित हुई तीसरी आँखों के दो आंख लापता और सरकारी दस्तावेज गड़बड़ हो गए।

नगरपालिका परिषद किरंदुल से अपील: तुरंत उच्च स्तरीय जांच कराएं, दोषियों पर कार्रवाई करें, और दस्तावेजों की कॉपी सार्वजनिक करें। अन्यथा यह लोकतंत्र और पारदर्शिता पर सवाल उठाएगा।

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