*किरंदुल नगरपालिका में छालीवाल परिवार का अवैध वसूली रैकेट! सुनील कुमार छालीवाल पर 50 की जगह 250 रुपये वसूलने का आरोप*

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*किरंदुल नगरपालिका में छालीवाल परिवार का अवैध वसूली रैकेट! सुनील कुमार छालीवाल पर 50 की जगह 250 रुपये वसूलने का आरोप*

किरंदुल (दंतेवाड़ा): नगरपालिका परिषद किरंदुल में अस्थाई दखल शुल्क की आड़ में चल रहे बड़े घोटाले का नया खुलासा हुआ है। प्रथम अपिली अधिकारी शशिभूषण महापात्र द्वारा सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारी से एक बार फिर छालीवाल परिवार के नाम का बवाल मच गया है। इस बार ठेकेदार साहिल कुमार छालीवाल के मंझले चाचा सुनील कुमार छालीवाल पर सीधा आरोप लगा है कि उन्होंने 50 रुपये की पर्ची पर 250 रुपये वसूल किए।

नगरपालिका परिषद किरंदुल के क्रमांक ///राजस्व/२४ पत्र (दिनांक 12.06.2026) के अनुसार, वार्ड क्रमांक 01 के निवासी श्री दिलीप सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अस्थाई दखल वसूली ठेकेदार साहिल कुमार छालीवाल के कार्यरत कर्मचारी सुनील कुमार गुप्ता ने 50 रुपये के स्थान पर 250 रुपये लिए। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य अधिकारी ने इसे परिषद की बैठक में निर्णय के लिए भेज दिया है।

छालीवाल परिवार का सुनियोजित खेल?

सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी और इस आधिकारिक पत्र को देखकर लगता है कि यह कोई साधारण गलती नहीं, बल्कि छालीवाल परिवार द्वारा सुनियोजित तरीके से अवैध वसूली का हिस्सा है। ठेकेदार साहिल छालीवाल के कर्मचारी बताए जा रहे उनके चाचा सुनील कुमार छालीवाल पर आरोप है। इससे पहले भी छालीवाल परिवार से जुड़े रिश्तेदार के नाम पर ठेकेदारी में गड़बड़ी सामने आ चुकी है।

याद रहे, कुछ समय पहले ठेकेदार सुखदेव पोयाम की निविदा में भी छालीवाल परिवार के रिश्तेदार से जुड़ी गलती से 50 रुपये की जगह 500 रुपये काटे जाने का मामला अखबारों में आया था। उस समय मात्र 3-4 घंटे के अंदर मुख्य अधिकारी शशिभूषण महापात्र ने निविदा निरस्त कर दी थी। अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या वह भी छालीवाल परिवार को ठेकेदारी दिलाने का सुनियोजित खेल था?

नगरपालिका मुख्य अधिकारी पर सवालों की बौछार

मुख्य अधिकारी शशिभूषण महापात्र कब तक इस पूरे मामले की जांच पूरी करेंगे?

जांच में और कितने नाम सामने आएंगे?

क्या छालीवाल परिवार का कोई और सदस्य भी इस अवैध वसूली के खेल में शामिल है?

पूरा दंतेवाड़ा जिला इस परिवार के नाम से खलबली में है। क्या यह परिवार अकेला जिम्मेदार है या मनोज छालीवाल ही इस पुरे खेल के मास्टरमाइंड है?

पीड़ित ड्राइवर और वाहन मालिक को कार्यालय बुलाने, एफआईआर दर्ज करने समेत अन्य कार्रवाई के लिए अंतिम फैसला अब परिषद की बैठक में होना है। लेकिन सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद इतनी देरी क्यों?

नगरपालिका परिषद किरंदुल को सख्त चेतावनी: पारदर्शिता बनाए रखें, जनता के हित में तुरंत जांच पूरी करें और दोषियों पर कार्रवाई करें। अन्यथा यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।

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