*किरंदुल नगरपालिका घोटाले में BJP नेता मनोज छालीवाल का नाम, RTI से चौंकाने वाले खुलासे – 5 लोगों का गैंग, कोई कार्रवाई नहीं, राजनीतिक संरक्षण का आरोप*
किरंदुल (दंतेवाड़ा), 14 जुलाई 2026 – किरंदुल नगरपालिका में 50 रुपये की सरकारी अस्थाई दखल शुल्क पर्ची पर 250 रुपये वसूलने वाले भ्रष्टाचार के मामले में अब बड़ा राजनीतिक धमाका हुआ है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्रथम अपिली अधिकारी द्वारा प्राप्त जानकारी से पता चला है कि नगरपालिका प्रशासन ने न तो कोई कार्रवाई की, न ही कोई जांच शुरू की। ठेकेदार राम छलीवाल को नोटिस देकर बयान दर्ज किया गया, जिसमें 5 लोगों ने हस्ताक्षर दर्ज नाम सामने आए हैं। क्या ये 5 लोग इस लूट के मास्टरमाइंड हैं?
सबसे बड़ा सवाल – क्या BJP नेता मनोज छालीवाल इस अवैध वसूली के खेल में शामिल हैं? विवादों में घिरे पूर्व विधायक प्रतिनिधि जितेंद्र गुप्ता, और मुख्य पैसा वसूलने वाला सुनील गुप्ता जो सभी बीजेपी से है आरोप लग रहे हैं कि वे भाजपा का चोला ओढ़कर पार्टी के दम पर यह रैकेट चला रहे थे। सुनील गुप्ता द्वारा ट्रक ड्राइवरों से धमकी देकर की गई वसूली के पीछे राजनीतिक हाथ हावी था या नहीं – यह अब जांच का विषय बन गया है।
RTI का चौंकाने वाला खुलासा
जन सुचना अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार:
अवैध वसूली पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कोई जांच नहीं की गई।
सिर्फ ठेकेदार राम छलीवाल को बुलाकर बयान दर्ज किया गया, जिसमें 5 लोगों के नाम हस्ताक्षर दर्ज हैं।
नगरपालिका मुख्य अधिकारी अब सवालों के घेरे में हैं – क्या वे मनोज छालीवाल जैसे नेताओं के दबाव में कार्रवाई से बच रहे हैं?
सरकारी नियमों और RTI के जवाब देने में भी लापरवाही बरती जा रही है।
ट्रक ड्राइवरों की शिकायतें और पिछले खुलासे के बावजूद पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है। क्या यह सिर्फ सुनील गुप्ता का अकेला खेल था या BJP जिला संगठन के कुछ शीर्ष नेताओं का पूरा नेटवर्क इसमें शामिल है? मनोज छालीवाल का नाम आने से भाजपा की छवि पर फिर सवाल उठ रहे हैं – “चौकीदार” का नारा देश स्तर पर तो अच्छा लगता है, लेकिन किरंदुल जैसे छोटे शहर में पार्टी के नाम पर अवैध कमाई का खेल क्यों
जनता पूछ रही है
मनोज छालीवाल और अन्य 4 लोग इस लूट में कितने गहरे तक शामिल हैं?
मुख्य अधिकारी क्यों दबाव में हैं?
BJP जिला संगठन इस घोटाले को दबाने की कोशिश क्यों कर रहा है?
क्या “सैयां भैया कोतवाल” वाली कहावत फिर साबित हो रही है?
यह मामला अब सिर्फ नगरपालिका का नहीं, बल्कि राजनीतिक भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गया है। जिला प्रशासन, मुख्य नगरपालिका अधिकारी और BJP नेतृत्व को तुरंत सफाई देनी होगी। SIT जांच या स्वतंत्र जांच समिति गठित कर दोषियों पर सख्त एक्शन लिया जाए – यही किरंदुल की जनता की मांग है।
अभी देखना यह है कि प्रशासन इस धमाकेदार RTI खुलासे पर क्या एक्शन लेता है या फिर सब कुछ दबा दिया जाएगा? भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग अब और मुखर हो रहे हैं।
