*किरंदुल में 18 साल से अधर में लटका ओवरब्रिज: भूमाफियाओं का अवैध अतिक्रमण बढ़ा रहा एन एम डी सी किरंदुल परियोजना की मुसीबतें*
दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), 17 दिसंबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल क्षेत्र में वार्ड नंबर 8 के पास बन रहा एक महत्वपूर्ण ओवरब्रिज पिछले लगभग 18 वर्षों से निर्माणाधीन है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पुल न केवल क्षेत्र का प्रमुख मार्ग है, बल्कि इसे ‘एशिया का सबसे महंगा पुल’ कहा जा रहा है। हालांकि, धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्य के कारण पुल पूरा होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच, पुल के आसपास एन एम डी सी किरंदुल परियोजना
की खाली जगह पर भूमाफियाओं द्वारा टिना शेड डालकर अवैध अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, जो भविष्य में निर्माण कार्य में बड़ी बाधा बन सकता है।
यह मार्ग नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएमडीसी) के भरण संयंत्र का मुख्य रास्ता है। यहां से भारी-भरकम हाइवा वाहन लोड लेकर रेलवे लोडिंग यार्ड तक जाते हैं। स्थानीय निवासियों की शिकायत है कि पुल के निर्माण में हो रही देरी का फायदा उठाकर भूमाफिया सक्रिय हो गए हैं। अवैध निर्माण जोरों पर है, जिससे आने वाले दिनों में एनएमडीसी की परिवहन व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया, “पुल का काम इतनी धीमी गति से चल रहा है कि लगता है यह कभी पूरा नहीं होगा। इसी का फायदा उठाकर लोग टिना शेड और अन्य अवैध निर्माण कर रहे हैं। अगर एनएमडीसी ने अभी ध्यान नहीं दिया तो आगे बड़ी मुसीबतें खड़ी हो जाएंगी। ये अवैध कब्जे न केवल पुल निर्माण में बाधा बनेंगे, बल्कि भारी वाहनों की आवाजाही को भी प्रभावित करेंगे।”
एनएमडीसी किरंदुल कॉम्प्लेक्स बैलाडिला आयरन ओर माइंस का प्रमुख केंद्र है, जहां से देश भर में आयरन ओर की सप्लाई होती है। हाल के वर्षों में एनएमडीसी ने यहां रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कई प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, जिसमें किरंदुल में थर्ड लोडिंग लाइन के लिए नया ब्रिज भी शामिल है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर पुराने ओवरब्रिज की देरी और अतिक्रमण की समस्या प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है।
स्थानीय प्रशासन और एनएमडीसी अधिकारियों से इस मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही है। अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर अवैध निर्माणों को रोका जाए, ताकि पुल का काम तेजी से पूरा हो सके और क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था सुचारु रहे। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या एनएमडीसी के लिए ही बड़ा सिरदर्द बन सकती है।
यह मामला एक बार फिर सरकारी प्रोजेक्ट्स में देरी और अतिक्रमण की पुरानी समस्या को उजागर करता है। उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी जल्द इस पर ध्यान देंगे।
