*बड़ी खबर: भारत के सभी बंदरगाहों की सुरक्षा अब CISF के हाथ में*
सरकार का मास्टर स्ट्रोक – छोटे-बड़े हर EXIM पोर्ट पर एकसमान, विश्वस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू
नई दिल्ली | 28 नवंबर 2025
भारत सरकार ने देश के बंदरगाह सुरक्षा तंत्र में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को अंतरराष्ट्रीय ISPS कोड के तहत मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन (Recognized Security Organisation – RSO) घोषित कर दिया है। इसका सीधा मतलब – अब देश के सभी प्रमुख और गैर-प्रमुख EXIM बंदरगाहों की सुरक्षा मूल्यांकन, योजना और कोर ऑपरेशंस की कमान CISF के पास होगी।
क्यों है यह फैसला गेम-चेंजर?
छोटे बंदरगाहों की पुरानी कमजोरियां खत्म
अब तक कई गैर-प्रमुख बंदरगाहों पर सुरक्षा व्यवस्था गैर-मानक और असमान थी। CISF अब हर बंदरगाह के लिए नया Port Facility Security Assessment (PFSA) और Port Facility Security Plan (PFSP) खुद तैयार करेगा।
नया हाइब्रिड सिक्योरिटी मॉडल लागू
कोर सिक्योरिटी (मुख्य सुरक्षा कार्य) → सिर्फ CISF
सहायक कार्य (ट्रैफिक मैनेजमेंट, गेट कंट्रोल आदि) → राज्य पुलिस, SISF या प्रमाणित प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी
इससे जवाबदेही बढ़ेगी और खर्च भी नियंत्रित रहेगा।
प्राइवेट गार्ड्स को भी CISF जैसा प्रशिक्षण अनिवार्य
अब कोई भी प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड बिना CISF के विशेष बंदरगाह सुरक्षा प्रशिक्षण और सर्टिफिकेशन के पोर्ट पर तैनात नहीं हो सकेगा।
JNPA (मुंबई) और चेन्नई पोर्ट पर पायलट ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी
जल्द ही अलग “बंदरगाह सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान” स्थापित होगा (एयरपोर्ट की तरह BCAS/AVSEC मॉडल)
ब्लू इकोनॉमी को मिलेगा बड़ा बूस्ट
सुरक्षित बंदरगाह = तेज कार्गो हैंडलिंग = कम लॉजिस्टिक्स लागत = भारत का बढ़ता निर्यात
यह कदम सीधे-सीधे प्रधानमंत्री की “पोर्ट-लेड डेवलपमेंट” और “ब्लू इकोनॉमी विजन 2047 से जुड़ा है।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
पूर्व नौसेना अधिकारी और मैरीटाइम सिक्योरिटी एक्सपर्ट कैप्टन एस.के. मेहता:
“यह फैसला 15 साल पुराना गैप भर रहा है। अब भारत के बंदरगाह सिंगापुर और दुबई स्तर की सुरक्षा की ओर बढ़ रहे हैं।”
संक्षेप में:
एक देश – एक समान बंदरगाह सुरक्षा मानक
CISF अब भारत के समुद्री द्वारों का “संरक्षक” बन गया है।
यह बदलाव सिर्फ सुरक्षा का नहीं, भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार में नंबर-1 बनाने की बुनियाद है।

