*ब्रेकिंग: बचेली शराब घोटाला अब ‘करोड़ों का काला साम्राज्य’ बन चुका – उच्च अधिकारीयों तक पहुँची लूट की लकीर, पूर्व मंत्री जेल में, अब बारी इनकी?*
दंतेवाड़ा/रायपुर, 27 नवंबर 2025: जो कल तक “केवल चार सेल्समैन की शरारत” बताया जा रहा था, वह आज छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग का सबसे बड़ा घोटाला बन चुका है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार बचेली सरकारी शराब दुकान का 1 करोड़ 70 लाख का QR घोटाला सिर्फ़ सेल्समैन और मैनेजर तक सीमित नहीं है – इसमें आबकारी विभाग के बड़े-बड़े अधिकारी भी डूबे हुए हैं। सूत्रों का सनसनीखेज दावा है कि लूटी गई रकम की बंदरबांट ऊपर तक हो चुकी है और यही वजह है कि महीनों से चल रहा यह खेल किसी की नजर में नहीं आया।
*आंकड़े खुद चीख-चीख कर बता रहे हैं – यह कोई 14 दिन का खेल नहीं!*
आबकारी विभाग के ही जिला अधिकारी ने पहले बताया था:
बचेली: रोज़ाना बिक्री 7-8 लाख रुपये
किरंदुल: 7-8 लाख
गीदम: 8-9 लाख
दंतेवाड़ा शहर: 9-10 लाख
*अगर बचेली में औसतन 7.5 लाख प्रतिदिन बिक्री है, तो 14 दिन में कुल बिक्री = 7.5 लाख × 14 = करीब 1 करोड़ 5 लाख रुपये*
*लेकिन सिर्फ़ ऑनलाइन पेमेंट में ही 1 करोड़ 70 लाख रुपये गायब दिखाए जा रहे हैं!*
सवाल उठता है –
यह अतिरिक्त 65 लाख रुपये कहाँ से आए?
*और अगर ऑनलाइन में ही 1.70 करोड़ लूट लिए गए, तो नकद में कितने करोड़ डकार गए होंगे?*
साफ़ है – यह घोटाला महीनों नहीं, सालों से चल रहा है।
ऊँगली सीधे रायपुर के गलियारों तक
सूत्र बता रहे हैं कि बचेली दुकान से जो पैसा ऊपर जा रहा था, उसकी हिस्सेदारी पहले से तय थी।
“जब तक ऊपर वालों का पेट नहीं भरता, नीचे वाला खेल नहीं चलता” – एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा।
यही वजह है कि करोड़ों की लूट के बावजूद कोई सुपरवाइजर, कोई इंस्पेक्टर, कोई डिप्टी कमिश्नर ने बचेली दुकान का हिसाब-किताब नहीं देखा।
शराब घोटाला – छत्तीसगढ़ की “परंपरा” बन गया?
2022-23 में ही छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री टी.एस. सिंहदेव के करीबी रहे अधिकारी और नेता जेल जा चुके हैं।
*सरकारीकरण के बाद हर साल कोई न कोई नया घोटाला सामने आ रहा है।*
अब बचेली कांड ने साबित कर दिया कि सरकारी हाथों में आने के बाद भी शराब का कारोबार “सबसे सुरक्षित लूट का धंधा” बना हुआ है।
*जनता का पैसा – नक्सलियों से लड़ने की जगह अधिकारियों की जेब में!*
दंतेवाड़ा नक्सल प्रभावित इलाका है। यहाँ का शराब राजस्व बस्तर में सुरक्षा, स्कूल, अस्पताल, सड़क के लिए इस्तेमाल होना था।
लेकिन अब ये पैसे रायपुर के बंगलों, लग्जरी गाड़ियों और बैंकॉक-दुबई की टिकटों में खर्च हो रहे हैं।
जनता अब पूछ रही है:
जब 14 दिन में 1.70 करोड़ ऑनलाइन ही लूट लिया, तो पूरे साल में कितने सौ करोड़ गए होंगे?
उच्च अधिकारियों के नाम कब सामने आएंगे?
क्या मुख्यमंत्री अब भी कहेंगे कि “हमने शराब माफिया खत्म कर दिया”?
बचेली का यह घोटाला कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के आबकारी तंत्र की सड़ांध का सबसे ताज़ा सबूत है।
जब तक बड़े अधिकारीयों की कॉलर नहीं पकड़ी जाएगी, तब तक हर सरकारी शराब दुकान एक “लाइसेंसी लूट का ठेका” बनी रहेगी।
अब देखना यह है कि सरकार इस बार भी लीपापोती करती है या सचमुच सर्जिकल स्ट्राइक करती है।
पर जनता का गुस्सा साफ़ दिख रहा है – “शराब बेचो या लूटो, दोनों एक साथ नहीं चलेंगे!”
